हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने अपने संदेश मे कहा कि ईरान की सम्मानित जनता एक बड़ी परीक्षा के मुहाने पर खड़ी है अतः सबको एकता और एकजुटता तथा मैदान मे मौजूदी को बाकी रखना चाहिए।
उन्होने कहाः एक बार फ़िर सुप्रीम लीडर की दर्दनाक और असहनीय शहादत पर इस्लामी उम्मत और उनके सम्मानित परिवार की सेवा मे संवेदना प्रकट करते हुए उन्होने कहा कि कई वर्षो की सेवा के बाद दीन के मार्ग मे बा बरकत शहादत को स्वीकार किया और अब वह हज़रत सय्यद अल शोहदा और इमाम हसन बिन अली अलैहेमस्सलाम के दस्तरखान के मेहमान है।
आयतुल्लाह जवादी आमोली ने आगे कहा हम इन अज़ीम सैन्य कमांडरो और नेताओ की शहादत को भी श्रृद्धांजली अर्पित करते है और उनके परिवारो से संवेदना प्रकट करते है। इसी तरह अपने दूसरे शहीद हम वतनो की शहादत को भी मुबारक समझते है जिन्होने इस्लाम और इस्लामी वतन की रक्षा के लिए क़ुरबानी दी और शहादत की सआदत हासिल की।
उन्होने इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की हदीस "مَن قُتِلَ دُونَ مالِهِ ظُلما فهُو شَهیدٌ" को बयान करते हुए कहाः यह दीनी लाजिक है कि जब एक व्यक्ति ने इमाम मासूम अलैहिस सलाम से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति हमारे माल, धरती और ज़मीन पर हमला करे तो क्या करें तो इमाम (अ) ने फ़रमाया فاقتُله دَمُه علَیََّ अर्थात उसकी हत्या कर दो उसका ख़ून मेरे ज़िम्मे है। तो आज इज़रायल और ट्रम्प जैसो का खून बहाना भी बिलकुल इसी तरह है। इस समय इमाम ज़माना का संदेश यह है कि इज़राईलीयो और अत्याचार अमेरिका के खिलाफ युद्द करो उसका खून मेरे ज़िम्मे।
इस मरजअ तक़लीद ने मीनाब के स्कूल के मासूम बच्चो और दूसरे शहीद होने वाले बच्चो की शहादत पर भी दुख का इजहार करते हुए कहाः इन नन्हे बच्चो ने कम आयु मे ही शहादत का स्वाद चख लिया। हम उनके सम्मानित परिवारो से संवेदना प्रकट करते है और दुआ करते है कि उन सब का हश्र कर्बला के शहीदो और हक के मार्ग के शहीदो के सैथ हो।
उन्होने कहाः जो व्यक्ति राहे हक और दीन के खातिर शहीद होता है वह तमाम नबीयो के साथ महशूर होगा।
आयतुल्लाह जवादी आमोली ने कहाः मैने कई बार इन मीसाइल बनाने वाले प्रियो के बारे मे कहा है सलामुल्लाहे अलैहे चूकि यह इमाम जमाना (अ) के बेहतरीन सहायको मे से है, जिस तरह आइम्मा अलैहेमुससलाम के विशेष साथी उनके मददगार थे। इसी तरह यह अपने सुप्रीम लीडर, इस्लामी गणतंत्र ईरान और जनता के मददगार है।
उन्होने अंत मे इस्लामी समाज मे एकता बनाए रखने पर बल देते हुए कहाः हम इस समय एक बड़ी परीक्षा के करीब है अतः हमे पूर्ण रूप से एकता और एकजुटता की रक्षा करनी चाहिए। अगर इस समय कुछ मुशकिलात है तो आगे बे शुमार कामयाबी मौजूद है। हमे समझना चाहिए कि दुशमन हमारी धरती को विभाजित करना चाहता है जबकि यह भूमि हमारे सम्मान, इज़्ज़त और जान की हैसीयत रखती है।
आपकी टिप्पणी